फोर्टिस एस्कॉर्ट्स फरीदाबाद ने शुरू किया फरीदाबाद का “पहला विशेष अल्ज़ाइमर्स क्लिनिक”

फरीदाबाद, 23 सितंबर, 2026:* फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने आज शहर के पहले विशेष अल्ज़ाइमर्स क्लिनिक की शुरुआत की और इसके साथ ही अल्ज़ाइमर्स और डिमेंशिया जैसी याद्दाश्त संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे मरीज़ों की व्यवस्थित और विशेष देखभाल के लिहाज से एक नया मानक स्थापित किया है। यह विशेष अल्ज़ाइमर्स क्लिनिक *डॉ. विनीत बंगा, निदेशक एवं प्रमुख, न्यूरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के नेतृत्व में हर शुक्रवार को दोपहर 12 बजे से 1 बजे* के दौरान काम करेगा। इस क्लिनिक का उद्देश्य व्यवस्थित ढंग से जांच, समय से बीमारी का पता लगाना, नियमित फॉलो-अप के साथ-साथ काउंसिलिंग और जरूरत के हिसाब से बीमारी में सुधार के लिए थेरेपी के लिए व्यापक जांच करने में मदद करना है। 


अल्ज़ाइमर्स की गहरा और लंबे समय तक का बोझ न सिर्फ इस बीमारी का सामना कर रहे लोगों पर पड़ता है, बल्कि उनका साथ दे रहे और उनकी देखभाल कर रहे लोगों और परिवार के सदस्यों को भी समस्या का सामना करना पड़ता है। बीमारी का असर बढ़ने पर देखभाल करने वाले लोगों की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं – दवाओं का ध्यान रखने, अपॉइंटमेंट और रोजाना के कामकाज से लेकर भावनात्मक और शारीरिक सहयोग देने तक और अक्सर इसके साथ-साथ उन लोगों को अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर प्रतिबद्धताएं भी पूरी करनी होती हैं। इसकी वजह से परिवार और देखभाल करने वाले लोगों पर अत्यधिक शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक और वित्तीय बोझ पड़ता है। ऐसे में नए अल्ज़ाइमर्स क्लिनिक की शुरुआत, अल्ज़ाइमर्स बीमारी और डिमेंशिया से जुड़ी अन्य समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए, मरीज़ों को केंद्र में रखकर की जाने वाली देखभाल की व्यापक व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है। बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ इस क्लिनिक का लक्ष्य समय से उपचार को बढ़ावा देना, जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद करना और समय से बीमारी का पता लगाने और कॉग्निटिव यानी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की देखभाल के महत्व के बारे में जागरूकता का प्रसार करना है। 


*डॉ. विनीत बंगा, निदेशक एवं प्रमुख, न्यूरोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद* ने कहा, “अनुमान है कि भारत में वृद्धों की आबादी वर्ष 2011 के 10.4 करोड़ से बढ़कर 2036 तक 23 करोड़ हो जाएगी जो देश की आबादी का लगभग 20 फीसदी है। डेमोग्राफी यानी जनसांख्यिकी में होने वाले इस बदलाव से आयु संबंधी अल्ज़ाइमर्स जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का बोझ भी बढ़ने की संभावना है। इसलिए अल्ज़ाइमर्स के शुरुआती लक्षणों को समझना इस बीमारी के बोझ को कम करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। याद्दाश्त संबंधी समस्याएं बार-बार होने, बार-बार चीजें भूल जाने, रोजाना की गतिविधियां करने में मुश्किल होने, भाषा या संवाद संबंधी समस्याएं होने और समय व जगह को लेकर बार-बार संदेह होने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।”


*डॉ. बंगा* कहते हैं, “अल्ज़ाइमर्स की बीमारी में बहुत ही सावधानीपूर्वक और व्यापक जांच की आवश्यकता होती है क्योंकि याद्दाश्त के चले जाने के कई संभावित कारण हो सकते हैं और हर मरीज़ की जांच और उसके उपचार की योजना का दृष्टिकोण अलग-अलग होना चाहिए। समय से बीमारी का पता लग जाने पर समय से और उचित उपचार किया जा सकता है और परिवार व देखभाल करने वाले लोगों के बोझ को कम किया जा सकता है।” 


*डॉ. अभिषेक शर्मा, फेसिलिटी निदेशक, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद* ने कहा, “इस विशेष अल्ज़ाइमर्स क्लिनिक की शुरुआत का उद्देश्य याद्दाश्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों और उनके परिवारों की व्यवस्थित देखभाल की ज़रूरत को पूरा करना है। हमारे अस्पताल में लेकैनमैब थेरेपी का उपलब्ध होना, क्लिनिकल जांच, उपचार के दौरान निगरानी और सपोर्ट सिस्टम की उपलब्धता के महत्व को दर्शाता है। अल्ज़ाइमर्स की देखभाल सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए नियमित जांच, काउंसिलिंग और फॉलो-अप की आवश्यकता होती है। यह क्लिनिक फरीदाबाद और आसपास के इलाकों के मरीज़ों को यह व्यवस्थित देखभाल उपलब्ध कराएगी।”

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