फरीदाबाद, 25 जून। लिंग्याज़ विद्यापीठ में वर्तमान समय की औद्योगिक आवश्यकताओं एवं शिक्षा जगत के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से "एकेडेमिया–इंडस्ट्री इंटरफेस" का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में चल रही पाठ्यक्रम संशोधन एवं अद्यतन प्रक्रिया पर उद्योग विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर पाठ्यक्रम को अधिक रोजगारोन्मुख, कौशल-आधारित एवं उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना था।
इस अवसर पर उद्योग जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ श्री रवि कुमार मावा (मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), विशाल नेल्स), श्री प्रमोद राणा (अध्यक्ष, आईएमटी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन), श्री संदीप हांडा (अध्यक्ष, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया)- फरीदाबाद चैप्टर), श्रीमती शिवानी शर्मा (ग्लोबल जीआरसी (गवर्नेंस, रिस्क एवं कंप्लायंस) प्रमुख, आईरिस सॉफ्टवेयर इंक.), श्री कमल धमीजा (मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO), आईरिस सॉफ्टवेयर इंक.) सहित अन्य विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विभागाध्यक्षों एवं वरिष्ठ शिक्षकों ने भी सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में सतत एवं समग्र मूल्यांकन को अधिक महत्व दिया जाने
तथा विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल, परियोजना-आधारित अधिगम, समस्या समाधान क्षमता एवं उद्योग-उन्मुख दक्षताओं के मूल्यांकन को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाये जाने पर जोर दिया गया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक कार्यस्थल की चुनौतियों के लिए भी तैयार करे।
कार्यक्रम का सफल समन्वयन विश्वविद्यालय के मुख्य परिचालन अधिकारी सीओओ श्री प्रेम सलवान द्वारा किया गया। उन्होंने उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच इस प्रकार के नियमित संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय के
वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) योगेश चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी उद्योग विशेषज्ञों, विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझाव विश्वविद्यालय की पाठ्यचर्या को अधिक प्रभावी, प्रासंगिक एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विश्वविद्यालय के चांसलर श्री पिचेश्वर गड्डे ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए पूरी टीम को बधाई दी. और साथ ही कहा उद्योग और शिक्षा जगत के बीच निरंतर संवाद ही गुणवत्तापूर्ण, नवाचार-आधारित एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च शिक्षा का आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के विचार-विमर्श से विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता एवं व्यावसायिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
Comments
Post a Comment