लिंग्याज विद्यापीठ को भारत सरकार एमएसएमई मंत्रालय से मिली 'होस्ट इंस्टीट्यूशन' के रूप में मंजूरी .



फरीदाबाद: लिंग्याज विद्यापीठ के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण में, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के विकास आयुक्त कार्यालय ने विश्वविद्यालय को एक बड़ी सौगात दी है। मंत्रालय ने इनोवेटिव स्कीम' (इनक्यूबेशन कंपोनेंट) के तहत विश्वविद्यालय को होस्ट इंस्टीट्यूशन के रूप में आधिकारिक तौर पर मान्यता और सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान कर दी है।  


​नई दिल्ली में विकास आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित 10वीं पीएमएसी की उच्च स्तरीय बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इस महत्वपूर्ण मंजूरी के बाद अब लिंग्याज विद्यापीठ के छात्र, शोधकर्ता और क्षेत्र के युवा इनोवेटर्स अपने अनूठे और रचनात्मक स्टार्टअप आइडियाज के लिए सीधे भारत सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के हकदार बन गए।  

​मंत्रालय से प्राप्त आधिकारिक पत्र के दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजनाओं के सफल और पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय खुद को पीएफएमएस पोर्टल पर होस्ट इंस्टीट्यूशन के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। इसके साथ ही,

एक विशेष शून्य शेष चालू खाता भी सक्रिय कर दिया गया है। विश्वविद्यालय जल्द ही नए विचारों के विकास और फंड के उचित उपयोग के लिए निर्धारित प्रोफार्मा के तहत अपनी अंतिम प्रतिबद्धता साझा करने जा रहा है।  

​इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. पिचेश्वर गड्डे और वाइस चांसलर मेजर जनरल डॉ. योगेश चौधरी ने पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एमएसएमई मंत्रालय से मिली यह मंजूरी केवल एक आधिकारिक पत्र नहीं है, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों के तकनीकी कौशल को प्रदर्शित करने, उनके नए विचारों को पेटेंट कराने और उन्हें नौकरी ढूंढने वाले के बजाय 'रोजगार प्रदाता' (एंटरप्रेन्योर) के रूप में स्थापित करने का एक मजबूत व ऐतिहासिक मंच है। यह कदम देश को "विकसित भारत 2047" और "स्किल इंडिया" की दिशा में आगे ले जाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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