यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय बच्चे की जान बचाई।
फरीदाबाद : एडवांस सर्जिकल एक्सपर्टीज और समय पर इलाज का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए, सेक्टर-88 स्थित यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डॉक्टरों ने 11 वर्षीय मास्टर विवान की जान सफलतापूर्वक बचाई। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए इस बच्चे को अन्य अस्पतालों ने केस की कॉम्प्लेक्सिटी के कारण इलाज देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उसे बेहद क्रिटिकल हालत में यथार्थ अस्पताल लाया गया।
अस्पताल पहुंचने पर बच्चे को एक्यूट एब्डॉमेन की स्थिति में पाया गया, जो ब्लंट एब्डॉमिनल ट्रॉमा के कारण हुआ था। जांच में जेजुनल परफोरेशन (नियर पैंक्रियास), ट्रॉमैटिक हर्निया जिसमें ट्रांसवर्स कोलन शामिल था, और पायोपेरिटोनियम (पेट में पस और ब्लड जमा होना) जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। मरीज को तेज दर्द, सूजन, उल्टी और गंभीर इंफेक्शन भी था, जिससे यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण और जानलेवा बन गया था।
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के सर्जिकल डिसिप्लिन्स के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. बालकिशन गुप्ता ने कहा, “यह एक बेहद क्रिटिकल और कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा केस था। मरीज में जेजुनल परफोरेशन के साथ ट्रॉमैटिक एब्डॉमिनल हर्निया था, जिसमें आंत के हिस्से फंसे हुए थे, जिससे पेट के अंदर गंभीर इंफेक्शन फैल चुका था। अंदर पस का काफी ज्यादा जमाव और कई जगहों पर चोट होने के कारण तुरंत सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्ण और रिस्की था। बच्चे की हालत अस्थिर थी और अंदरूनी नुकसान काफी ज्यादा था, ऐसे में जरा सी भी गलती की गुंजाइश नहीं थी।”
सर्जिकल टीम ने एक बेहद कॉम्प्लेक्स लैप्रोस्कोपिक-असिस्टेड एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी की, जिसके बाद स्टेपलर की मदद से ड्यूडिनल-जेजुनल एनास्टोमोसिस, हर्निया रिपेयर, पेरिटोनियल लैवेज, एड्हीसियोलिसिस और फीडिंग जेजुनोस्टोमी की गई। सर्जरी के दौरान पेट से लगभग 1.500 लीटर पस निकाला गया। सर्जरी के बाद मरीज को आईसीयू में रखा गया, जहां उसे वेंटिलेटरी सपोर्ट, आईवी एंटीबायोटिक्स और लगातार मॉनिटरिंग दी गई। बेहतर रिकवरी के लिए बाद में VAC ड्रेसिंग के साथ एब्सेस ड्रेनेज की एक और प्रोसीजर भी की गई।
इलाज और रिकवरी के बारे में बताते हुए डॉ. बालकिशन ने आगे कहा, “इस सर्जरी में मल्टी-स्टेप अप्रोच अपनाई गई। सबसे पहले इमरजेंसी में पेशेंट को स्टेबल किया गया और इंफेक्शन को कंट्रोल किया गया। इसके बाद डैमेज हुई आंत को सावधानीपूर्वक रिपेयर किया गया और अंत में पेट की संरचना को दोबारा सामान्य स्थिति में लाया गया। सर्जरी के बाद मरीज को फीडिंग जेजुनोस्टोमी के जरिए न्यूट्रिशन सपोर्ट दिया गया और एडवांस VAC थेरेपी से घाव की देखभाल की गई। मरीज ने इलाज पर अच्छा रिस्पॉन्स दिया, धीरे-धीरे उसकी स्थिति स्थिर हुई और लगातार सुधार देखने को मिला, जिसके बाद उसे स्टेबल कंडीशन में डिस्चार्ज किया गया।”
यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर, श्री परमिंदर सिंह ने कहा, “यथार्थ हॉस्पिटल्स में हम समय पर, एडवांस और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, खासकर ऐसी गंभीर आपातकालीन स्थितियों में जहां हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस युवा मरीज की सफल रिकवरी हमारी मल्टीडिसिप्लिनरी टीमों की क्षमता, क्लीनिकल एक्सपर्टीज और अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दर्शाती है, जो हमें अत्यंत कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा मामलों का प्रभावी ढंग से इलाज करने और सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सकारात्मक परिणाम हासिल करने में सक्षम बनाता है।”
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मरीज की लगातार मॉनिटरिंग, इमेजिंग और वाउंड केयर की गई। समय पर सर्जिकल इंटरवेंशन और बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की बदौलत बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ और वह सामान्य रूप से खाना खाने और शरीर के जरूरी कार्य करने में सक्षम हो गया।
डिस्चार्ज के समय मरीज पूरी तरह स्टेबल और बुखार मुक्त था। उसे दवाइयों के साथ वाउंड केयर, फिजियोथेरेपी और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। यह केस दर्शाता है कि जटिल ट्रॉमा मामलों में तेज डायग्नोसिस, सटीक सर्जरी और मल्टीडिसिप्लिनरी केयर कितनी महत्वपूर्ण होती है, और यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की एडवांस और लाइफ-सेविंग हेल्थकेयर प्रदान करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। अस्पताल में नियमित रूप से अत्यंत कॉम्प्लेक्स एब्डॉमिनल वॉल डिफेक्ट्स, बार-बार होने वाली हर्निया की समस्याओं और ट्रॉमा से जुड़ी सर्जिकल जटिलताओं का स्थायी उपचार किया जाता है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक बेहतर रिकवरी और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हासिल करने में मदद मिलती है।

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