फरीदाबाद, 14 मई। भीषण गर्मी का असर अब केवल त्वचा और शरीर की थकान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। तापमान बढ़ने के साथ हार्ट से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है। इस संबंध में ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर 86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. ऋषि गुप्ता ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। गर्मी के मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के लिए हृदय को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है। यही स्थिति कई बार हार्ट अटैक, अनियमित धड़कन और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बनती है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से बुजुर्ग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और पहले से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को गर्मी में अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने, पर्याप्त पानी न पीने और अत्यधिक शारीरिक मेहनत करने से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कई लोग गर्मी में सीने में जलन, घबराहट या सांस फूलने जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह हार्ट संबंधी परेशानी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, छाछ और इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थ लेते रहें। तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन कम करें तथा हल्का और संतुलित आहार लें। नियमित दवाइयां लेने वाले मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी दवा बंद न करें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द, तेज पसीना, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर उपचार मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
डॉ. ऋषि गुप्ता के अनुसार बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को अपने दिल की सेहत के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी और सही जीवनशैली अपनाकर गर्मी में हार्ट संबंधी बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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